मध्यम दर्जे का सहज व्यायाम है पैदल चलना
जानकारी : व्यायाम या कसरत सभी को जरूर करनी चाहिए। कसरत कई तरह की होती है। जिस कसरत में अधिक हलचल हो उसे आइसोटोनिक कसरत कहा जाता है। जैसे भागना, दौड़ना, तैराकी, पहाड़ चढ़ना, साइकिल चलाना, खेल जैसे फुटबाल, टेनिस, क्रिकेट आदि आइसोटोनिक या समतानी व्यायाम हैं। जब हम काफी देर तक कोई भारी चीज़ उठाते हैं, या भार को हाथों से आगे-पीछे या ऊपर-नीचे धकेलते हैं, लेकिन पेशियों के तन्तुओं की लम्बाई पर कोई असर नहीं होता। ऐसी क्रिया को आइसोमेट्रिक या सममितीय व्यायाम कहा जा सकता है। जब कोई इंसान साइकल रिक्शा खींच रहा होता है या कोई मजदूर हाथ गाड़ी धकेलता है, तो ऐसे में उनके द्वारा पैरों से हलचल और हाथों से स्थाई बल लगाया जाता है। इसका अर्थ है कि यहां आइसोमेट्रिक और आइसोटोनिक दोनों का प्रयोग हो रहा होता है। बाजुओं को आइसोमेट्रिक और पैरों को आइसोटोनिक से फायदा होता है।
चलना : चलना एक मध्यम दर्जे का और सहज व्यायाम होता है। यह सभी उम्र के लोगों के लिए (खासतौर पर दिल की बीमारियों से प्रभावित लोगों के लिए) काफी उपयोगी होता है। शारीरिक फायदों के अलावा चलने से स्फूर्ति और आराम मिलता है। एक किलोमीटर मध्यम गति से चलने पर करीब 50 कैलोरी उर्जा खर्च होती है। इसलिये जितना हो सके चलना चाहिये।
खेल : सामूहिक खेलकूद केवल कसरत करने से कहीं ज़्यादा उपयोगी होते हैं। खेलों में मज़ा तो आता ही है साथ ही शारीरिक कसरत भी हो जाती है। लेकिन सभी खेल एक जितने उपयोगी नहीं होते हैं।
आसन : किसी निश्चित समय के लिए किसी निश्चित स्थिति में रहने को आसन कहा जाता है। आसन में आइसोमैट्रिक व आइसोटोनिक कसरतें सभी शामिल होती हैं और इससे शरीर में रक्त का बहाव और पेशियों के तालमेल और सहने की क्षमता आदि बढ़ते हैं।
मुद्राएं : मुद्राएं दरअसल चेहरे की कसरतें होती हैं। उदाहरण के लिये सिंह मुद्रा चेहरे की पेशियों को स्वस्थ बनती है।
चलना : चलना एक मध्यम दर्जे का और सहज व्यायाम होता है। यह सभी उम्र के लोगों के लिए (खासतौर पर दिल की बीमारियों से प्रभावित लोगों के लिए) काफी उपयोगी होता है। शारीरिक फायदों के अलावा चलने से स्फूर्ति और आराम मिलता है। एक किलोमीटर मध्यम गति से चलने पर करीब 50 कैलोरी उर्जा खर्च होती है। इसलिये जितना हो सके चलना चाहिये।
खेल : सामूहिक खेलकूद केवल कसरत करने से कहीं ज़्यादा उपयोगी होते हैं। खेलों में मज़ा तो आता ही है साथ ही शारीरिक कसरत भी हो जाती है। लेकिन सभी खेल एक जितने उपयोगी नहीं होते हैं।
आसन : किसी निश्चित समय के लिए किसी निश्चित स्थिति में रहने को आसन कहा जाता है। आसन में आइसोमैट्रिक व आइसोटोनिक कसरतें सभी शामिल होती हैं और इससे शरीर में रक्त का बहाव और पेशियों के तालमेल और सहने की क्षमता आदि बढ़ते हैं।
मुद्राएं : मुद्राएं दरअसल चेहरे की कसरतें होती हैं। उदाहरण के लिये सिंह मुद्रा चेहरे की पेशियों को स्वस्थ बनती है।

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