नाग पंचमी के बाद रक्षाबंधन और जन्माष्टमी

अगस्त महीने में पड़ने वाले महत्वपूर्ण पर्व निम्न हैं—
1 अगस्त को हरियाली अमावस्या है। ये दिन प्रकृति की हरियाली बनाए रखने का संदेश देता है। इस दिन घर में या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं।
3 अगस्त को हरियाली तीज है। इस दिन महिलाएं अपने पति के सौभाग्य के लिए माता पार्वती की पूजा करती हैं।
4 अगस्त को विनायकी चतुर्थी रहेगी। इस दिन गणेशजी के लिए व्रत-उपवास किए जाते हैं।
5 अगस्त को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन जीवित सांप को दूध चढ़ाने से बचें। शिवलिंग पर और नाग देव की प्रतिमा पर दूध चढ़ा सकते हैं।
11 अगस्त को पुत्रदा एकादशी है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास करना चाहिए।
15 अगस्त को भाई-बहनों का विशेष पर्व रक्षाबंधन रहेगा। इस दिन शिवजी को और अपने आराध्य देव को भी राखी अवश्य बांधें।
अगस्त से हिन्दी पंचांग का नया माह भाद्रपद शुरू हो जाएगा।
19 अगस्त को गणेश चतुर्थी व्रत रहेगा।
21 अगस्त को हल षष्ठी यानी श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम की जयंती है।
23 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व रहेगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को पीले वस्त्र चढ़ाएं। माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
26 अगस्त को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी रहेगी। इसे जया और अजा एकादशी कहा जाता है।
30 अगस्त को भाद्रपद मास की अमावस्या है। इस तिथि पर पितर देवताओं के लिए धूप-ध्यान करना चाहिए। अमावस्या तिथि पर पितरों के श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए।

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