लापरवाही के चलते आ जाती हैं मुसीबतें

बोधकथा : एक बार डेनमार्क में फार्म हाउस का मालिक फ्रांसिस अपना सामान बेचकर वापस अपने गांव लौट रहा था। अपने घोड़े की चाल के ढंग से उसे लगा कि शायद घोड़े की नालों में से कोई एक नाल ढीली है। घर पहुंचने की उतावली और कुछ लापरवाही में उसने सोचा कि इतनी नालों में से एक नाल की कील अगर निकल भी गई तो क्या फर्क पड़ेगा। यही सोचते हुए उसने घोड़े की लगाम खींचते हुए घोड़ा दौड़ा दिया। लेकिन एक कील कम होने की वजह से वह नाल ढीली होकर रास्ते में ही निकल गई और घोड़ा उसके बिना ही बहुत आगे निकल गया। फ्रांसिस ने सोचा-काश, यहां कोई लुहार या नाल ठीक करने वाला मिल जाता तो नाल दुरुस्त करवा कर ही आगे बढ़ता। वह ऐसे ही आगे बढ़ चला। आगे रास्ता कंटीला और पथरीला होने के कारण घोड़े का संतुलन बिगडऩे लगा और वह लंगड़ा कर चलने लगा। तभी झाडिय़ों में से दो डाकू सामने आ धमके और उसके लंगड़ाते घोड़े को रोककर उसका सारा धन लूट लिया। अब उसके पास रोते-पीटते घर लौटने के अलावा कोई चारा न था। वह समझ गया कि छोटी-छोटी बातों को लापरवाही से टालना ही बड़ी मुसीबतों का कारण बन जाता है।

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