26 नवम्बर 2020 को है देवउठनी एकादशी, शुरू होंगे शुभ कार्य


 ज्योतिष : कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं, इसे देवोत्थान और देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। इस बार यानि 2020 में देवउठनी एकादशी 26 नवम्बर को पड़ेगा। सनातन परम्परा में देवउठनी एकादशी को बहुत ही शुभ कहा गया है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान विष्णु नींद से जागेंगे, जो चार महीने पहले देवशयनी एकादशी यानि 1 जुलाई 2020 को सो गये थे। 


शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने दैत्य शंखासुर को मारा था। भगवान विष्णु और दैत्य शंखासुर के बीच युद्ध लम्बे समय तक चलता रहा। युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु बहुत अधिक थक गए। तब वे क्षीर सागर में आकर सो गए और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागे। तब सभी देवताओं द्वारा भगवान विष्णु का पूजन किया गया।
विष्णु मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे।
वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात।।

– त्वमेव माता च पिता त्वमेव।
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।
त्वमेव सर्वं मम देवदेव:।।

– शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम।।
लक्ष्मीकान्तंकमलनयनं योगिर्भिध्यानगम्यम।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम।


इसके अलावा देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह की भी परम्परा है। भगवान शालिग्राम के साथ तुलसी जी का विवाह होता है। जालंधर को हराने के लिए भगवान विष्णु ने बृंदा नामक विष्णु भक्त के साथ छल किया था। इसके बाद बृंदा ने विष्णु को श्राप देकर पत्थर बना दिया। लेकिन लक्ष्मी माता की विनती के बाद उन्हें वापस सही करके सती हो गई थीं। उनकी राख से ही तुलसी के पौधे का जन्म हुआ और उसके साथ शालिग्राम के विवाह का चलन शुरू हुआ।

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