सुभाष बाबू का संकल्प

बोधकथा : स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस बचपन में बांग्ला भाषा में बहुत कमजोर थे। एक बार अध्यापक ने उन्हें गाय पर निबंध लिखने को कहा। उन्होंने किसी तरह अंदाज से लिख दिया। अध्यापक ने जब उनका निबंध पढ़ा तो सब लड़के हंस पड़े। उन पर घड़ों पानी पड़ गया। तभी उन्होंने दृढ़ संकल्प किया कि बांग्ला पूरी तरह सीखकर रहेंगे। उन्होंने दिन-रात एक करके बांग्ला का व्याकरण कंठस्थ कर लिया। उन्हें बांग्ला भाषा अच्छी तरह से आ गई पर उन्होंने इस बात को गुप्त रखा। वार्षिक परीक्षा हुई। उनके सहपाठियों को लगता था कि सुभाष बांग्ला भाषा में फेल हो जाएंगे, लेकिन उनकी आशाओं पर तब पानी फिर गया जब उन्हें अन्य विषयों के साथ-साथ बांग्ला में भी सबसे ज्यादा अंक मिले और आगे चलकर यही सुभाष बाबू ने अंगे्रजों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

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