बुरे कर्मों का बखान

बोधकथा : महात्मा बुद्ध की सभा में एक दिन एक डाकू आया और उनके वचनों से प्रभावित होकर उनके चरणों में सिर झुकाता हुआ बोला- महाराज, मैं एक डाकू हूं और अपने लूट, खसोट और भागदौड़ के जीवन से परेशान हो गया हूं। मैं यह सब छोड़कर सुधरना चाहता हूं। कृपया मेरा मार्गदर्शन कीजिए। बुद्ध बोले-तुम डकैती और झूठ बोलना छोड़ दो, एक दिन सब ठीक हो जाएगा। डाकू उन्हें प्रणाम करके चला गया। कुछ दिन बाद आकर फिर बोला-महाराज, मैंने बहुत कोशिश की, मगर सफल न हो सका। स्वभाव है न, छूटता ही नहीं। इस पर बुद्ध गंभीरता से बोले-फिर ठीक है। तुम जो चाहे करो। मगर दिन भर में जो भी बुरे कर्म करो, शाम को वापिस आकर चौपाल में सबके सामने उनका बखान कर दो। डाकू खुश हो गया कि यह तो बड़ा सरल उपाय बताया। फिर तो वह कई महीने तक आया ही नहीं। एक दिन वह आया तो उसका रूप ही बदला हुआ था। आते ही बोला-महाराज, मैंने तो उस उपाय को बहुत सरल समझा था। मगर सारा दिन बुरे कर्म करने के पश्चात शाम को सबके सामने उनका बखान करने में बड़ी लज्जा आती थी। धीरे-धीरे गलत कामों से तौबा करने लगा और आज देखिए, मैं सब बुरे काम छोड़कर मेहनत व मजदूरी कर रहा हूं।

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