सबसे शक्तिशाली देवी हैं दुर्गा, असुरों को काबू करने के लिए नवरात्रि का पर्व


 आस्था।
देवताओं को भगाकर जब महिषासुर ने स्वर्ग पर कब्जा किया तो सभी देवता मिलकर त्रिमूर्ती यानी ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पाए गए और उन तीनों ने अपने शरीर की ऊर्जा से एक आकृति बनाई, यहीं पर देवी दुर्गा ने जन्‍म हुआ। इस रूप में सभी देवताओं ने अपनी अपनी शक्तियां डाली, इसीलिए दुर्गा को शक्ति भी कहा जाता है, इसलिए वो सबसे ताकतवर मानी जाती हैं, उन्हें शिव का त्रिशूल, विष्णु का चक्र, बह्मा का कमल, वायु देव से नाक, हिमावंत (पर्वतों के देवता) से कपड़े, धनुष और शेर मिला और ऐसे एक-एक कर शक्तियों से वो दुर्गा बनी।
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो: स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।
दारिद्र्यदुःख भयहारणिका त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाचिता।।

भावार्थ : मां दुर्गे ! आप स्मरण करने पर सब प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ जनों द्वारा चिंतन करने पर उन्हें परम कल्याणकारी बुद्धि प्रदान करती हैं। दुःख, दरिद्रता और भय हरने वाली देवि ! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिए सदा ही दया से भरा रहता हो?
शरद का नवरात्र भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भारतीय पर्व है जब शक्ति की आराधना का अवसर उपस्थित होता है, इस समय ग्रीष्म और वर्षा के संतुलन के साथ शीत ऋतु का आगमन हो रहा होता है। इसके साथ ही प्रकृति की सुषमा भी निखरती है। इस तरह के परिवर्तन के साथ प्रकृति हमारे लिए शक्ति और ऊर्जा के संचय का अवसर निर्मित करती है। यह शक्ति या सामर्थ्य मूलत: आसुरी प्रवृत्तियों को वश में रखने के लिए होती है। आसुरी शक्तियों से रक्षा और सात्विक प्रवृत्ति के संवर्धन के लिए शक्ति की देवी की आराधना की जाती है। वैसे तो देवी नित्यस्वरूप वाली हैं, अजन्मा हैं, समस्त जगत उन्हीं का रूप है और सारे विश्व में वह व्याप्त हैं फिर भी उनका प्राकट्य अनेक रूपों में होता है। अनेकानेक पौराणिक कथाओं में शुभ, निशुम्भ, महिषासुर, रक्तबीज राक्षसों के उन्मूलन के लिए देवी विकराल रूप धारण करती हैं और राक्षसों के उपद्रवों से मुक्ति दिलाती हैं। देवी वस्तुतः जगदंबा हैं और हम सभी उनके निकट शिशु हैं। वे माँ रूप में सबकी हैं और आश्वस्त करती हैं कि निर्भय रहो। वह भक्तों के लिए सुलभ हैं। उनकी भक्ति की परंपरा में 'नव दुर्गा' प्रसिद्ध हैं। इनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की परिगणना होती है परन्तु देवी के और भी रूप हैं जिनमें चामुंडा, वाराही, ऐन्द्री, वैष्णवी, माहेश्वरी, कुमारी, लक्ष्मी, ईश्वरी और ब्राह्मी प्रमुख रूप से चर्चित हैं। ये सभी रूप दैत्यों के नाश, भक्तों के लिए अभय और देवताओं के लिए कल्याण के लिए शस्त्र धारण करती हैं।


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