दोस्ती प्रगाढ़ करने की राह पर भारत और रूस


विचार : सितम्बर 2019 के पहले सप्ताह के बाद भारत और रूस के रिश्तों में पुरानी गर्मजोशी लौट रही है। आज जब व्यापारिक और सामरिक क्षेत्रों में अमेरिका के एकतरफा दबदबे ने संयुक्त राष्ट्र से लेकर विश्व व्यापार संगठन तक तमाम वैश्विक संस्थाओं को बेमानी बना रखा है, तब भारत और रूस की नजदीकी बहुत मायने रखती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिन के रूस दौरे में बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन के साथ कई अहम मसलों पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने आपसी व्यापार को 11 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2025 तक 30 अरब डॉलर करने का निश्चय किया और समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का आह्वान किया।
रूस ने सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया। अभी कश्मीर के संदर्भ में मोदी का यह दौरा बेहद अहम था। दरअसल भारत को इस मसले पर चौतरफा समर्थन की दरकार है क्योंकि पाकिस्तान अभी इस पर दुनिया भर में दुष्प्रचार करता फिर रहा है। रूस ने स्पष्ट कहा कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामले में बाहरी दखल के खिलाफ है।
इस दौरे की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि रूस ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ सेंट ऐंड्रू द अपोसल' देने की घोषणा की। व्लादिवोस्तोक में रूस और भारत के डेलिगेशन के बीच 20वें द्विपक्षीय सम्मेलन के बाद दोनों देशों ने रक्षा, तकनीक और ऊर्जा से लेकर स्पेस मिशन तक कई अहम समझौते किए। रूसी रक्षा उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स भारत में दोनों देशों के जॉइंट वेंचर द्वारा बनाने का समझौता हमारे लिए रोजगार की दृष्टि से उपयोगी रहेगा। दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच एक समुद्री रास्ता सुनिश्चित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। एलएनजी की आपूर्ति के लिए हुए करार के तहत रूसी कंपनी नोवाटेक भारत, बांग्लादेश और अन्य बाजारों में गैस की बिक्री के लिए एक एलएनजी टर्मिनल के निर्माण में धन लगाएगी।
इस अवसर पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि अंतरिक्ष में हमारा लंबा सहयोग नई ऊंचाइयां छू रहा है। गगनयान यानी भारत के मानवयुक्त अंतरिक्ष यान के लिए भारत के ऐस्ट्रॉनॉट्स रूस में ट्रेनिंग लेंगे। रूस के सहयोग से न्यूक्लियर प्लांट भारत में पहले से ही बन रहे हैं। अफगानिस्तान को लेकर उन्होंने साफ कहा कि भारत अपने पड़ोस में एक स्वतंत्र, शांत और लोकतांत्रिक अफगानिस्तान देखना चाहता है।
इस अवसर पर पूतिन ने भारत और रूस के सहयोग को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देश 2020 तक सैन्य और तकनीकी सहयोग पर अपने द्विपक्षीय कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू कर रहे हैं तथा इसको 10 साल और बढ़ाने के लिए इसे अद्यतन बनाने पर काम कर रहे हैं। भारत और रूस के रिश्तों में यह गर्मजोशी पूरी दुनिया के लिए एक शुभ संकेत है क्योंकि सच्चे अर्थों में एक बहुध्रुवीय विश्व का सपना ऐसे रिश्तों से ही पूरा होगा।
 
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