अपनी गुणवत्ता बनाये रखें

प्रेरक कथा : बहुुत समय पहले एक संत थे। संत ने अपने हाथ में सोने का सिक्का लेकर अपने शिष्यों व अनुयाइयों से कहा कि किसको यह सोने का सिक्का चाहिए, अधिकतर लोगों ने हां कहा। संत ने सोने के सिक्के को जमीन पर रगड़कर व गंदाकर कहा कि अब किसे यह सोने का सिक्का चाहिए, लगभग सभी हाथ खड़े थे। तब संत ने कहा कि मैंने आपके सामने इस सोने के सिक्के के साथ न जाने क्या-क्या किया। फिर भी आप सब इसे पाना चाहते हो, क्योंकि लाख मरोडऩे व गंदा करने पर भी सोने के मूल्य में परिवर्तन नहीं आया। अभी भी इसकी कीमत जस की तस है। कई बार हमारी जिंदगी भी हमें कई समस्याओं व परेशानियां देकर हमें विचलित कर देती है और हम अपने आप को कम मूल्यवान समझने लगते हैं। जब तक व्यक्ति अपनी गुणवत्ता नहीं खोयेगा, वह समाज में मूल्यवान बना रहेगा।

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