दुनिया की अनोखी खूबसूरती है भगवद्भक्ति

प्रेरक कथा। भक्तिमयी मीराबाई अपने आराध्य श्रीकृष्ण के प्रेम में सदा भागवमग्न रहती थीं। एक दिन पूर्णिमा की रात को जब चंद्रमा की चांदनी चारों ओर छिटक रही थी, वह अपने कक्ष के अंदर किसी दूसरी ही दिव्य सृष्टि की ज्योत्स्ना का आनंद लूट रही थीं। इतने में महल की किसी दासी ने आकर ध्यानमग्न मीरा को बाहर से पुकारा, बाई सा! बाहर आकर देखो, कैसी खूबसूरत रात है। कई बार पुकारने पर वह बोलीं, इस समय मैं जिस परम सौंदर्य में डूबी हूं, जगत का समस्त सौंदर्य मिलकर भी उसकी एक बूंद के बराबर नहीं है। उन्होंने कहा कि तुम एक बार मेरे दिल के अंदर घुसकर देखो, भगवद्भभक्ति में दुनिया के परे की कैसी अनोखी खूबसूरती है।

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