70 हजार साल बाद गुजरेगा हरी पूंछ वाला रहस्यमय धूमकेतु

जानकारी। हरी पूंछ वाला लियोनार्ड धूमकेतु आगामी 12 दिसम्बर को धरती के पास से गुजरेगा, इसे वर्ष का सबसे चमकदार धूमकेतु कहा जा रहा है। 14 दिसम्बर के बाद से यह सूर्यास्त के बाद आसमान आकाश में दिखाई देगा। इसे देखने के लिए सबसे अच्छा समय 17 दिसम्बर को होगा, इस दौरान लियोनार्ड धूमकेतु की चमक सबसे तेज रहेगी। महीने में शाम को कुछ समय के लिए इस चमकीले हरे बर्फ के गोले को सूर्यास्त के बाद दिखाई देने की सम्भावना है। इस दौरान धूमकेतु की हरे रंग की एक पूंछ भी दिखाई देगी। इस बर्फीली चट्टान का आंतरिक भाग सूर्य के जितना करीब आता है, उतना ही गर्म होता है। इससे पहले यह नीली धूल, फिर पीले या सफेद और अंत में हरे रंग का उत्सर्जन करता है। हरे रंग की पूंछ का मतलब यह धूमकेतु काफी गर्म है। इसमें बहुत सारे साइनाइड और डायटोमिक कार्बन हैं और इसके टूटने की सम्भावना भी उतनी ही ज्यादा है। करीब 70 हजार साल में ऐसा पहली बार होगा। इस धूमकेतु की खोज इसी साल जनवरी महीने में की गई थी। इस धूमकेतु को सी/2021 ए1 के नाम दिया गया है। इस दौरान इसकी पृथ्वी से दूरी लगभग 21 मिलियन मील (35 मिलियन किमी) होगी। इसे रात के समय पूरे महीने आकाश में देखा जा सकेगा और जैसे-जैसे महीना खत्म होगा, इसकी चमक बढ़ती चली जाएगी। उत्तरी गोलाद्र्ध में इसे पूर्व और पूर्वोत्तर दिशा में किसी टेलिस्कोप या दूरबीन की मदद से देखा जा सकता है। इस धूमकेतु की खोज खगोलविद ग्रेगरी जे लियोनार्ड ने की थी। यह धूमकेतु करीब 35 हजार साल तक बाहरी अंतरिक्ष में रहने के बाद अब धरती के करीब आ रहा है। खगोल शास्त्र के जानकारों के अनुसार 12 दिसम्बर को इसे देखने के लिए सबसे अच्छा समय सूर्योदय से कुछ घंटे पहले का रहेगा। बता दें कि धूमकेतु सौरमण्डलीय निकाय है जो पत्थर, धूल, बर्फ और गैस के बने हुए छोटे-छोटे खण्ड होते है। यह ग्रहो के समान सूर्य की परिक्रमा करते है। छोटे पथ वाले धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा एक अण्डाकार पथ में लगभग ६ से २०० वर्ष में पूरी करते है। ... लम्बे पथ वाले धूमकेतु एक परिक्रमा करने में हजारों वर्ष लगाते है।

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