ग्रह, नक्षत्रों के आधार पर रखे गये हैं बारहों महीनों के नाम
ज्योतिष।
शास्त्र के अनुसार पूर्र वर्ष को बारह महीनों में बांटा गया है। प्रत्येक
महीने में तीस दिन होते हैं। महीने को चंद्रमा की कलाओं के घटने और बढ़ने
के आधार पर दो पक्षों यानि शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभाजित किया गया
है। एक पक्ष में लगभग पंद्रह दिन या दो सप्ताह होते हैं। एक सप्ताह में सात
दिन होते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार बारहों महीनों के नाम और उन
महीनों में कौन सा मुख्य पर्व पड़ता है और मौसम का क्या मिजाज रहता है,
निम्न है—
चैत्र : यह महीना चित्रा नक्षत्र पर रखा गया है, चैत्र
पूर्णिमा के दिन हमेशा चित्रा या स्वाति नक्षत्र ही आता है। इस माह में मेष
राशि का गोचर रहता है। इसमें बसंत ऋतु रहती है। महाराष्ट्र में गुड़ी
पड़वा, तमिलनाडु में चैत्री विशु और कर्नाटक व आंध्रप्रदेश में उगादी जैसे
त्योहार मनाए जाते हैं।
बैसाख : यह माह विशाखा नक्षत्र पर रखा गया है
क्योंकि इसकी पूर्णिमा को हमेशा विशाखा या अनुराधा ही आता है। इस माह में
वृषभ राशि का गोचर रहता है। इसमें बसंत ऋतु के बाद ग्रीष्म ऋतु शुरू हो
जाती है। बैसाख पूर्णिमा को भगवान बुद्ध के जन्मोत्सव बुद्ध पूर्णिमा के
रूप में मनाया जाता है।
ज्येष्ठ : यह महीना ज्येष्ठ नक्षत्र पर रखा गया
है क्योंकि ज्येष्ठ पूर्णिमा को हमेशा ज्येष्ठा या मूल नक्षत्र ही आता है।
इस माह में मिथुन राशि का गोचर रहता। इसमें ग्रीष्म ऋतु रहती है। ज्येष्ठ
माह में अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाते हैं। इसके अलावा दशमी के दिन गंगा
दशहरा व ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी को निर्जला एकादशी व्रत रखा
जाता है और इसी महीने में वट पूर्णिमा या वट सावित्री की व्रत पूजा होती
है।
आषाढ़ : इस महीने का नाम पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र पर रखा
गया है क्योंकि इसकी पूर्णिमा को हमेशा पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़ या सतभिषा
नक्षत्र ही आता है। इस माह में कर्क राशि का गोचर रहता। इसमें आधे समय
ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु प्रारम्भ हो जाती है। आषाढ़ महीने की पूर्णिमा
के दिन गुरुपूर्णिमा का महापर्व मनाया जाता है, और अषाड़ मास में ही
देवशयनी एकादशी भी आती है।
श्रावण : इस माह श्रवण नक्षत्र पर रखा गया है
क्योंकि इसकी पूर्णिमा को हमेशा श्रवण या धनिष्ठा नक्षत्र ही आता है। इस
माह में कन्या राशि का गोचर रहता। इसमें वर्षा ऋतु रहती है। श्रावन मास की
पूर्णिमा के दिन ही रक्षाबंधन मनाने के साथ कांवड़ यात्रा निकाली जाती है।
भाद्रपद
: यह माह भाद्रपद या उत्तराभाद्रपद पर रखा गया है क्योंकि इसकी पूर्णिमा
को हमेशा भाद्रपद या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र ही आता है। इस माह में सिंह
राशी का गोचर रहता। इसमें वर्षा ऋतु रहती है। इसी महीने में भगवान
श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पर्व मनाया जाता है। इसके अलावा भी हरितालिका
तीज, गणेश चतुर्थी, ऋषि पंचमी, अष्टमी के दिन राधा अष्टमी और अनंत चतुर्दशी
भी इसी महीने होती है। इसी महीने पितृ पक्ष की भी शुरुआत होती है।
अश्विन
: यह माह अश्विनी नक्षत्र पर रखा गया है क्योंकि इसकी पूर्णिमा को हमेशा
अश्विन, रेवती या भरणी नक्षत्र ही आता है। इस माह में तुला राशी का गोचर
रहता। इसमें वर्षा शरद रहती है। आश्विन मास में ही शारदीय नवरात्रि,
दुर्गापूजा, कोजागिरी पूर्णिमा, विजयादशमी दशहरा जैसे बड़े पर्व उत्सव
मनाए जाते हैं।
कार्तिक : यह माह कृतिका नक्षत्र पर रखा गया है क्योंकि
इसकी पूर्णिमा को हमेशा कृतिका या रोहणी नक्षत्र ही आता है। इस माह में
वृश्चिक राशि का गोचर रहता। इसमें शरद ऋतु रहती है। कार्तिक मास में
गोवर्धन पूजा, भाई दूज, कार्तिक पूर्णिमा, गुरुनानक जयंती व इसी मास से
देवउठनी एकादशी से शुभ कार्यों का प्रारम्भ होता है।
मार्गशीर्ष या अगहन
: यह माह मृगशिरा नक्षत्र पर रखा गया है क्योंकि इसकी पूर्णिमा को हमेशा
मृगशिरा या उत्तरा नक्षत्र ही आता है। इस माह में धनु राशि का गोचर रहता।
इसमें हेमंत ऋतु रहती है। अगहन मास में वैकुण्ठ एकादशी मनाने के साथ इसी
माह में अन्नपूर्णा माता की पूजा भी की जाती है।
पौष : इस महीने का नाम
पुष्य नक्षत्र पर रखा गया है क्योंकि इसकी पूर्णिमा को हमेशा पुनर्वसु या
पुष्य नक्षत्र ही आता है। इस माह में मकर राशि का गोचर रहता। इसमें हेमंत
ऋतु रहती है। पौष मास में चहु ओर जिसमें अत्याधिक ठण्ड पड़ती है। इसी माह
संकट चौथ, लौहड़ी, पोंगल एवं मकर संक्राति जैसे कई त्यौहार मनाये जाते हैं।
माघ
: यह माह मघा नक्षत्र पर रखा गया है क्योंकि इसकी पूर्णिमा को हमेशा मघा
या अश्लेशा नक्षत्र ही आता है। इस माह में कुम्भ राशि का गोचर रहता। इसमें
शिशिर ऋतु रहती है। माघ मास में बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि, रथ सप्तमी जैसे
त्यौहार भी मनाये जाते हैं।
फाल्गुन : यह माह पूर्वाफाल्गुनी या
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पर रखा गया है क्योंकि इसकी पूर्णिमा को हमेशा
पूर्वाफाल्गुन, उत्तराफाल्गुन या हस्त नक्षत्र ही आता है। इस माह में मीन
राशि का गोचर रहता। इसमें शिशिर ऋतु रहती है। फाल्गुन माह में रंगों का
सबसे बड़ा त्योहार होली बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। इसी माह में
शीतलाष्टमी भी मनाई जाती है।
बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार
उपर्युक्त 12 महीनों के अलावा एक अतिरिक्त महीना होता है, जिसे पुरुषोत्तम
या अधिक मास कहा जाता है।
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