उत्तम परिणाम के लिए सही प्रयास जरूरी


बोधकथा : स्वामी रामकृष्ण परमहंस से एक बार उनके शिष्यों ने जिज्ञासा व्यक्त की कि जब अवतारी सत्ताएं आती हैं तो उनके शिष्यों में एकरूपता क्यों नहीं होती। किसी का आध्यात्मिक विकास ज्यादा होता है, किसी का कम, यदि अवतारी चाहें तो क्या सबकी समान आत्मिक प्रगति नहीं करा सकते।

रामकृष्ण परमहंस ने उत्तर दिया कि संसार में कर्मफल विधान का नियम है। हर व्यक्ति अपने द्वारा किए कर्मों के अनुसार प्रगति करता है, माध्यम चाहे कोई भी बने और अवतारों का कार्य बीज डाल जाना है, फिर वह चाहे जब भी फलित हो। छत पर बीज डला रह जाए तो घर ढह जाने पर भी उस बीज से पेड़ पैदा हो जाता है। कौन से बीज का पेड़ बनेगा यह उस बीज की संकल्पशक्ति पर निर्भर है। ठीक वैसे ही अवतार सब पर अनुग्रह करते हैं, लेकिन उसका फल वही पाते हैं, जो उसके लिए स्वयं भी संघर्ष करते हैं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तीस साल बाद तीन राशियों में होगा बड़ा बदलाव

सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रहा है माघ पूर्णिमा 2022

सौरव गांगुली : बीसीसीआई के निर्विरोध अध्यक्ष