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सकारात्मक सोचें, जरूर मिलेगी सफलता

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बोधकथा। एक निजी कम्पनी में नौकरी के लिये साक्षात्कार चल रहा था, जहां काफी युवक इंटरव्यू देने पहुंचे थे, उन सभी अभ्यर्थियों में से सिर्फ दो युवक का चयन होता है। कम्पनी के लिए दुविधा हो जाती है कि दोनों में से किसे इस जॉब के लिए लिया जाये। कम्पनी के हेड एक-दूसरे से विचार विमर्श करने के बाद उनको तरकीब सूझी,  दोनों युवक को अलग-अलग बुलाया जाता है। उनके सामने एक गिलास में 50 प्रतिशत पानी भर दिया जाता है और उन्हें सवाल पूछा जाता है कि आपको इस गिलास में क्या दिखाई दे रहा है। पहला युवक कहता है कि मुझे यह गिलास आधा खाली दिखाई दे रहा। दूसरा युवक कहता है कि मुझे यह गिलास आधा भरा हुआ दिखाई दे रहा है। कम्पनी के लिए दूसरा युवक का चयन करना आसान हो जाता है क्योंकि उन्हें उस युवक ने सकारात्मक दृष्टि दिखाई देती है और उस पहले युवक में उसका नजरिया नकारात्मक दिखाई देता है। कम्पनी वाले दूसरे युवक को उसकी सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण जॉब के लिए चुन लेते हैं, अर्थात हमें हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिए, तभी हमें सफलता मिल सकती है।

स्वयं ही दूर करनी होगी अपनी समस्याएं

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प्रेरक कथा। एक गरीब युवक था, युवक के ​माता-पिता बेहद ही गरीब थे। गरीबी की वजह से भोला अक्सर सोचा करता था कि जीवन कितना कठिन है। एक समस्या खत्म नहीं होती तो दूसरी शुरू हो जाती है। पूरा जीवन इन समस्याओं को हल करने में ही निकलता जा रहा है। युवक परेशान होकर एक दिन संत के पास पंहुचा और उन्हें सारी परेशानी बताई कि कैसे मैं अपनी जिंदगी की कठिनाइयों का सामना करूँ? एक परेशानी खत्म होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है। संत ने हंसकर बोला कि तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हारी परेशानी का हल बताता हूँ। संत युवक को लेकर एक नदी के किनारे पहुंचे और बोले कि मैं नदी के दूसरी पार जाकर तुमको परेशानी का हल बताऊंगा। यह कहकर साधु नदी के किनारे खड़े हो गए। नदी के किनारे खड़े-खड़े जब बहुत देर हो गयी, भोला बड़ा आश्चर्यचकित होकर बोला कि महाराज हमें तो नदी पार करनी है तो हम इतनी देर से किनारे पर क्यों खड़े हैं। संत ने कहा कि बेटा मैं इस नदी के पानी के सूखने का इंतजार कर रहा हूँ, जब ये सूख जायेगा फिर आराम से नदी पार कर लेंगे। युवक को साधु की बातें मूखर्तापूर्ण लगीं, वह बोला कि महाराज नदी का पानी कैसे सूख सकता है आप कैसी मूखर्ताप...

विजयदशमी पर श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां पढ़ने से मिलता है अपार सुख

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ज्योतिष। दशहरा का त्योहार दीपावली से ठीक 20 दिन पहले मनाया जाता है। इस साल दशहरा का त्योहार 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रमा मकर राशि और श्रवण नक्षत्र रहेगा। 15 अक्टूबर 2021 को दोपहर 2 बजकर 2 मिनट से दोपहर 2 बजकर 48 मिनट तक दशहरा पूजन का शुभ समय है। दशमी तिथि 14 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 15 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। पुरुषोत्तम श्री राम ने अधर्म, अत्याचार और अन्याय के प्रतीक रावण का वध करके पृथ्वीवासियों को भयमुक्त किया था और देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध करके धर्म और सत्य की रक्षा की थी। इस दिन भगवान श्री राम, दुर्गाजी, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और हनुमान जी की आराधना करके सभी के लिए मंगल की कामना की जाती है। समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विजयादशमी पर रामायण पाठ, श्री राम रक्षा स्त्रोत, सुंदरकांड आदि का पाठ किया जाना शुभ माना जाता है। विजयदशमी पर्व पर श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां पढ़ने का विधान है— धन प्राप्ति के लिए जिमि सरिता सागर मह जाही। जद्यपि तांहि कामना नाहीं।। तिमि सुख संपत्ति विनाहिं बोलाए। धर्मशील पह जाहिं सुभाएं।। दरिद्रता मि...

सबसे शक्तिशाली देवी हैं दुर्गा, असुरों को काबू करने के लिए नवरात्रि का पर्व

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 आस्था। देवताओं को भगाकर जब महिषासुर ने स्वर्ग पर कब्जा किया तो सभी देवता मिलकर त्रिमूर्ती यानी ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पाए गए और उन तीनों ने अपने शरीर की ऊर्जा से एक आकृति बनाई, यहीं पर देवी दुर्गा ने जन्‍म हुआ। इस रूप में सभी देवताओं ने अपनी अपनी शक्तियां डाली, इसीलिए दुर्गा को शक्ति भी कहा जाता है, इसलिए वो सबसे ताकतवर मानी जाती हैं, उन्हें शिव का त्रिशूल, विष्णु का चक्र, बह्मा का कमल, वायु देव से नाक, हिमावंत (पर्वतों के देवता) से कपड़े, धनुष और शेर मिला और ऐसे एक-एक कर शक्तियों से वो दुर्गा बनी। दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो: स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्र्यदुःख भयहारणिका त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाचिता।। भावार्थ : मां दुर्गे ! आप स्मरण करने पर सब प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ जनों द्वारा चिंतन करने पर उन्हें परम कल्याणकारी बुद्धि प्रदान करती हैं। दुःख, दरिद्रता और भय हरने वाली देवि ! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिए सदा ही दया से भरा रहता हो? शरद का नवरात्र भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भारतीय पर्व है जब शक्ति की आराधना का...

अयोध्या में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शारीरिक वर्ग

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जानकारी। अयोध्या में अखिल भारतीय शारीरिक वर्ग के लिए उतर बिहार प्रांत से किशनगंज जिला सहित तेरह स्वयंसेवकों का चयन किया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शारीरिक विभाग की ओर से आयोजित शारीरिक वर्ग अयोध्या में 18 अक्टूबर 2021 से शुरू होगी और पांच दिवसीय वर्ग चलेगी। अखिल भारतीय शारीरिक वर्ग में पूज्य सरसंघचालक मोहन भागवत जी और माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय हौसबोले जी का सानिध्य मिलेगा। विभिन्न शारीरिक योग में दंड, दंडयुद्ध, पद विन्यास आदि कुल दस विधाओं में एक-एक स्वयंसेवकों का चयन किया गया है। शारिरिक वर्ग में सभी प्रतिभागी स्वयंसेवक को देश के प्रत्येक प्रांत से 17 अक्टूबर 2021 सायं सात बजे तक अयोध्या कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने की सूचना है।

नवरात्रि के नौ दिन और दुर्गा के नौ रूप

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ज्योतिष। पितृ पक्ष समाप्त होते ही 7 अक्टूबर 2021 से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हुई। शरदीय नवरात्रि का प्रारंभ आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से होता है। इस दिन ही कलश स्थापना या घटस्थापना होता है और नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में किस दिन कौन सा रूप मां दुर्गा का होता है- शैलपुत्री : इस प्रथम दिन के उपासना में साधक या योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थिर करते हैं। यहीं से उनकी योगसाधना का प्रारम्भ होता हैं। शैल का अर्थ पर्वत यानी पर्वतराज हिमालय की पुत्री कहा जाता है। ब्रह्मचारिणी : ब्रह्म का अर्थ तपस्या है यानी तप की चारिणी के रूप में ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। इनकी उपासना मनुष्य के तप, त्याग, वैराग्य सदाचार संयम की वृद्धि करने वाली होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी साधक का मन मंतव्य पथ से विचलित नहीं होता। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में स्थिर होता है, इस चक्र में अवस्थित मन वाला योगी उनकी कृपा और शक्ति प्राप्त करता है। चन्द्रघण्टा : इनका यह स्वरूप परम शान्तिदा...

नवरात्रि में कन्या पूजन से मिलता है सुख, समृद्धि

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आस्था। आज यानि सात अक्टूबर 2021 को शरदीय नवरात्रि शुरू हुआ। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा की गयी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मां दुर्गा के श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की, दुर्गा मंदिरों पर काफी भीड़ देखी गयी। शास्त्रों के अनुसार शक्ति की पूजा का सम्बन्ध शिव से है। शैव शक्तियां ही दुर्गा नाम से जानी जाती हैं। दुर्गा या चण्डी के अनुष्ठान में नवदुर्गा (नव कन्याओं) का पूजन भी प्रचलित है। मंत्र महोदधि के अनुसार दो से नौ वर्ष तक की कुमारी बालिकाओं के पूजन का विधान है। अक्सर श्रद्धालु पंडितों से पूछते हैं कि भगवान शंकर को कौन सा पुष्प पसंद है या भगवान शंकर कौन से पुष्प अर्पित करने से प्रसन्न होते हैं। तो शास्त्रों में स्पष्ट वर्णित है कि जो पुष्प मां भगवती को पसंद है वही शंकर जी को पंसद है। शास्त्रों में कन्याओं के बारे में वर्णित है-1 वर्ष की कन्या सन्ध्या, 2 वर्ष की कन्या सरस्वती, 3 वर्ष की कन्या त्रिधामूर्ति, 4 वर्ष की कन्या कालिका, 5 वर्ष की कन्यासुभगा, 6 वर्ष की कन्या उमा, 7 वर्ष की कन्या मालिनी, 8 वर्ष की कन्या कुलजा, 9 वर्ष की कन्या कालसन्दभा, 10 वर्ष की कन्या अपर...