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आजादी के बाद से हम कर्तव्यविमुख हो गये, सिर्फ अधिकारों के लिये लड़े : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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विचार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर' का शुभारम्भ किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मन को छू लेने वाला उद्बोधन दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भाषा में कहें तो श्रीमान नरेंद्र मोदी का बौद्धिक उत्तम रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक-एक बात गौर करने लायक है। उन्होंने कहा कि आज करोड़ों भारतवासी स्वर्णिम भारत की आधारशिला रख रहे हैं। हमारी प्रगति राष्ट्र की प्रगति में निहित है। राष्ट्र का अस्तित्व हम से है और राष्ट्र से ही हमारा अस्तित्व है। यह अहसास नए भारत के निर्माण में भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत बन रहा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने ब्रह्म कुमारियों की सात पहलों को बटन दबाकर हरी झंडी दिखाई। इनमें मेरा भारत स्वस्थ भारत, आत्मानिर्भर भारत : आत्मनिर्भर किसान, 'महिलाएं : भारत की ध्वजवाहक', अनदेखा भारत साइकिल रैली, एकजुट भारत मोटर बाइक अभियान और स्वच्छ भारत अभियान के तहत हरित पहलें शामिल हैं। बता दें कि ब्रह्म कुमारी विश्वव्यापी आध्यात्मिक आंदोलन है। यह आंदोलन व्यक्तिगत परिवर्तन और विश्व नवीनीकरण को समर्पित है। भारत मे...

खरमास समाप्त, शुभ कार्य शुरू

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ज्योतिष : सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व विशेष माना जाता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और इसके साथ ही खरमास समाप्त हो जाते हैं और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। सूर्य के उत्तरायण होने और मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त होते ही अब तमाम शुभ कार्य शुरू हो गए हैं। इस वर्ष यानि 2022 में पंचांग के अनुसार विवाह के 57 दिन शुभ मुहूर्त हैं। 15 जनवरी तक खरमास और पंचश्लाका वेध के कारण विवाह का शुभ मुहूर्त नहीं था। शादी व विवाह सिर्फ तिथि ही नहीं, नक्षत्र, माह, तिथि, पंचश्लाका वेध, लग्न तथा शुभ ग्रह के हिसाब से तय होता है। मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो चुका है, लेकिन तिथि, नक्षत्र और ग्रहों का योग सही नहीं रहने के कारण शहनाई अगले सप्ताह से बजेगी। उसके बाद शादी शुरू होगी तथा जनवरी में 23, 24, 27 एवं फरवरी में दो, छह, सात, दस एवं 11 को विवाह की शुभ तिथि है। 11 फरवरी के बाद गुरु अस्त दोष रहने के कारण विवाह का मुहूर्त नहीं है। मार्च में गुरु अस्त और खरमास दोष के कारण विवाह का कोई मूहूर्त नहीं है। अप्रैल महीने में 17, 20, 21, 22, 24, 25, 27 व 28 को, मई में 2, 9, 11, ...

देशप्रेमी जापानी नागरिक

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संघ साहित्य : काफी समय पहले की बात है। उस समय जापान विकसित देशो में शामिल नहीं था, उस समय जापान में रेलगाड़ियों की हालत भी दयनीय थी। एक भारतीय भी उस रेलगाड़ी में यात्रा कर रहा था। रेलगाड़ी की सीट टूटी हुई थी, एक जापानी नागरिक भी उस ट्रेन में सफर कर रहा था। जापानी नागरिक ने अपने बैग से सूई धागा निकाला और सीट की सिलाई करने लगा, भारतीय नागरिक ने पूछा क्या आप रेलवे के कर्मचारी हैं, उसने कहा नहीं मैं एक शिक्षक हूं। मैं इस रेलगाड़ी से हर रोज आता-जाता हूं। इस सीट की खस्ता हालत देख बाजार से सूई, धागा खरीद लाया हूं, सोचा हर रोज इस सीट को देखकर मुझे महसूस होता था कि अगर कोई विदेशी नागरिक इसे देखेगा तो मेरे देश की कितनी बेइज्जती होगी, ऐसा सोचकर सीट की सिलाई कर रहा हूं। सलाम उस देश के शिक्षक को, जो देश की इज्जत अपनी इज्जत समझता हो और थोड़ा सा काम करता हो। और वह ही जापान आज इतना विकसित हो गया है कि हम उससे बुलेट ट्रेन खरीद रहे हैं। वहीं अपने देश की बात करें तो लोकतंत्र और अधिकारों के नाम पर वाहनों, दुकानों, मकानों आदि को फूंक देना आम बात है। 

कभी नहीं बुझती धन की प्यास

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विचार। पैसे का आकर्षण दिनों दिन बढ़ता ही जाता है। जिसने जीवन में पैसे को प्रधानता दी है, वह कभी भी सन्तोष-शान्ति का अनुभव नहीं कर सकेगा। महर्षि व्यास ने कहा है-धन की प्यास कभी नहीं बुझती उसकी ओर से मुँह मोड़ लेने में ही परम सुख है। पैसा दिन-रात जब मनुष्य को बचाता है तो उसका खाना, पीना, सोना हराम हो जाता है। यद्यपि धन जीवन की विविध आवश्यकताओं की पूर्ति का एक साधन है। इसका अर्जन भी करना चाहिए और उपयोग भी। तथापि पैसे को सर्वोपरि महत्व देना समाज के लिये बहुत घातक है। कल्पना कीजिए उस समाज की जहाँ पैसे को ही सर्वोपरि स्थान दिया जाता है। क्या उसके सदस्य कोल्हू के बैल की तरह पैसे के इर्द-गिर्द चक्कर काटते नहीं मिलेंगे? क्या पैसे के लिए एक दूसरे पर छीना झपटी करते हुए नहीं देखा जायेगा। उन्हें एक दूसरे के लिए प्रेम, सहानुभूति, आत्मीयता की जगह उसमें स्वार्थ, डाह, सूखापन का व्यवहार न होगा। सचमुच “पैसे की कसौटी पर आत्मिक नाते की कौन कहे, शारीरिक खून का नाता तक टूट जाता है।” पैसा समाज के मधुर सम्बन्धों में एक कठोर, निर्मम, दीवार बन जाता है। हमें जो धन मिलता है उसे बढ़ाने में कई गुना करने में लगना पड...

ईश्वर है या नहीं?

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विचार। अनीश्वरवादी विचारधारा के तर्कों का परीक्षण किया जाय और यह देखा जाय कि उनके कथन में कुछ सार भी है या नहीं? अनीश्वरवादियों का कथन है कि प्रकृति के जड़ परमाणु अपने आप अपनी धुरी पर घूमते हैं, बदलते और हलचल करते हैं, उसी से सृष्टि का क्रम चलता है तथा प्राणियों की उत्पत्ति होती है। ईश्वर की इसमें कुछ भी आवश्यकता नहीं है। इस कथन पर विचार करते हुए हमें देखना होगा कि क्या चेतन की प्रेरणा बिना जड़ पदार्थों में एक क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित गति-विधि निरन्तर चलते रहना सम्भव हो सकता है? देखते हैं कि कोई रेल, मोटर, जहाज, मशीन, अस्त्र आदि कितना ही महत्वपूर्ण एवं शक्ति शाली क्यों न हो, उसे चलाने के लिए चालक की बुद्धि ही काम करती है। राकेट से लेकर उपग्रह तक स्वचालित यन्त्र तभी अपनी सक्रियता जारी रख पाते हैं, जब रेडियो सक्रियता के माध्यम से मनुष्य उन्हें किसी दिशा विशेष में चलाते हैं। चालक के अभाव में अपनी इच्छा और शक्ति से यदि वस्तुएँ अपने आप ही चलने और काम करने लगें तो फिर उन्हें जड़ ही क्यों कहा जाय? मशीन से सम्बन्धित जितनी भी वस्तुएँ हैं वे सभी चालक की अपेक्षा रखती हैं। संचालन करने एवं प्रयोग ...

'संघ' के स्वयंसेवकों का 'दंड प्रहार'

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जानकारी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक प्रत्येक माह की 16 तारीख को स्वयंसेवक दंड प्रहार दिवस के रूप में मनाते हैं और हर 16 दिसम्बर को दंड महाप्रहार दिवस मनाते हैं। दंड प्रहार लगाने के पीछे अनेक उद्देश्य कार्य करते हैं। दंड अर्थात लाठी, प्रहार भांजना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ माह के प्रत्येक 16 तारीख को दंड प्रहार दिवस के रूप में लाठी का विधिवत प्रयोग करते हैं। वह दंड प्रहार लगाकर अपने शारीरिक क्षमता का आकलन करते हैं। अपनी रक्षा लाठी के माध्यम से करने का अभ्यास करते हैं। लाठी एक ऐसा माध्यम है, जिसके कुशल प्रयोग से ढेरों दुश्मनों को परास्त कर सकते हैं। उनका सामना सीमित संसाधनों के साथ भी किया जा सकता है। यह दिन प्रत्येक स्वयंसेवक के लिए अपने शारीरिक आकलन करने का दिन होता है। कुशलतापूर्वक दंड प्रहार लगाकर वह अपनी संख्या लिखते हैं, जिससे एक-दूसरे की संख्या की जानकारी होती है। दंड के लिए कोई कानूनन प्रतिबंध नहीं है। यही कारण है कि स्वयंसेवक कानून का सम्मान करते हुए दंड को अपनी शक्ति के रूप में घर में रखते हैं। एक बार की बात है—एक समय सौ भारतीयों पर चार सौ से अधिक चीन के लुटेरों ने हमल...

सूर्य के घोड़ों को कैसे मिलता है विश्राम!

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ज्योतिष। शास्त्र के अनुसार भगवान विष्णु की साधना के लिए खरमास का विशेष महत्व है। 12 महीनों में सूर्य देव 12 राशियों में प्रवेश करते हैं। जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं तो उस स्थिति को खरमास लग जाता है। साल में दो बार ऐसा समय आता है जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। ऐसी परिस्थिति में शुभ कार्य बंद हो जाते हैं और पूजन-अर्चन, ध्यान-साधना, दान-पुण्य शुरू हो जाते हैं। 2022 में 15 जनवरी को वैवाहिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। 23 फरवरी तक विवाह का योग रहेगा। 23 फरवरी के बाद गुरु के अस्त होने से विवाह आदि पर रोक रहेगी। इसी प्रकार मार्च में गुरु के अस्त और 15 मार्च से 15 अप्रैल तक खरमास होने के चलते विवाह नहीं होंगे। खरमास की कथा संस्कृत में गधे को खर कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों में वर्णित खरमास की कथा के अनुसार भगवान सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं। उन्हें कहीं पर भी रूकने की इजाजत नहीं है। उनके रुकते ही जनजीवन भी ठहर जाएगा, लेकिन जो घोड़े उनके रथ में जुड़े होते हैं वे लगातार चलने और विश्राम न मिलने ...